राम ही क्यों बने भगवान

राम जो थे एक कुंवर
दुनिया के छल कपट से बेखबर।
वह तो जाने सिर्फ नेक कर्म
माता पिता की आज्ञा ही उनका धर्म।
कुंवर को तो राजा था बनना निश्चित,
किस्मत उनके हक से किया वंचित।
राम ने धनुष तोड़कर सीता को पाया। रावण भी था मौजूद। कुछ नहीं कर पाया। रावण से युद्ध किया और स्थापित किया धर्मराज।
सोचा था कि एक और राजा करेगा अयोध्या पर राज,
लेकिन शिव ने कुछ अलग ही किया आगाज।
राम ने जन्म लिया सदियों के बाद,
धरती पर धर्म बना रहे हजारों साल बाद ।राम ने दिखाया कि राजा भी बन सकता है भिक्षु,
खोलने दुनिया के अभिमान के चक्षु ।
राम ने सिखाया उनके लिए एक हैं वन या महल,
कभी नहीं छोडो धर्म हमेशा होगा मंगल। राम ने दी कितनी ही परीक्षाएं,
स्थिर मन और सद्मार्ग की उनकी अभिलाषाएं ।
क्यों राम ही बने भगवान ,
करने दुनिया का कल्याण।
पांडवों ने भी तो खोया था हक,
उनको भी महल छोड़ जाना पड़ा था वन ।
अर्जुन ने भी मछली बेधकर द्रोपदी को था जीता।
कर्ण भी उपस्थित था, वंचित कुछ ना कर पाया ।
कर्ण को भी हराया युद्ध में लेकर कृष्ण का साथ ।
कहानी दोनों हैं लगभग समान।
लेकिन राम ही क्यों बने भगवान?
मर्यादा में रहकर राजा से बने भगवान,
कोई तो बताए कुछ और ऐसे नाम।
आज राम आयेंगे तो पूछेंगे क्या है आपका संदेश,
जिससे महान बने जाग में हमारा देश।
क्या है रहस्य? हर कोई करता है गुणगान।भारतवासी को भी दे कुछ ज्ञान।
छल कपट, लालच को छोड़कर आपका करे अनुसरण,
नैतिकता आचरण कर करें आपके भजन। फिर से वही सवाल राम कैसे बने भगवान? सिर्फ एक पत्नी का प्रण लिया,
सारे राजाओं को एक संदेश दिया।
पांडवों के पास थे राधे श्याम,
राम ने तो अकेले किए सारे काम।
जो धर्म का करे आचरण,
दुनिया उसीका करेगी अनुसरण।
आओ अपने अंदर के राम को जगाएं,
यही एक मार्ग है कि हम राम जी को पाएं। जय श्री राम।

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